ज्यामितिसंख्याएँ और संक्रियाएँ
पाइथागोरस
लगभग 570 ईसा पूर्व – लगभग 495 ईसा पूर्व · प्राचीन यूनान (सामोस)
समकोण त्रिभुज की तीन भुजाओं को एक ही नियम में बाँधने वाले
पाइथागोरस एक प्राचीन यूनानी विचारक थे, जिनका मानना था कि संसार की व्यवस्था संख्याओं में ही छिपी है, और उन्होंने इसी विश्वास के इर्द-गिर्द एक धार्मिक समुदाय की अगुवाई की। उनके नाम पर टिका प्रमेय दरअसल उनसे बहुत पहले बेबीलोनियों को भी पता था, पर उनके ही स्कूल ने इसे एक सार्वत्रिक नियम के रूप में स्थापित किया — इसीलिए उनका नाम इससे जुड़ा रह गया। यह कहानी कि उन्होंने स्वयं इसे सिद्ध किया, तथ्य से ज़्यादा किंवदंती के करीब है।
मुख्य योगदान
- पाइथागोरस प्रमेय को एक सार्वत्रिक नियम के रूप में स्थापित किया
- संख्या-केंद्रित विश्वदृष्टि 'सब कुछ संख्या है'
- संख्याओं और संगीत के सामंजस्य (अंतरालों के अनुपात) का अध्ययन किया