अपरिमेय एवं वास्तविक संख्याएँ
“अपरिमेय संख्या न कभी खत्म होती है, न दोहराती है — और कोई भिन्न इसे समेट नहीं सकती।”
शुरुआत
√2 को दशमलव में लिखें — 1.41421356… — न कोई अंत, न कोई पैटर्न। एक ऐसी संख्या जिसे आप कभी भिन्न (fraction) के रूप में नहीं लिख सकते: अपरिमेय संख्याओं का आगमन।
सरल शब्दों में
जिन संख्याओं को भिन्न (पूर्णांक/पूर्णांक) के रूप में लिखा जा सकता है, वे परिमेय (rational) हैं; जिन्हें नहीं लिखा जा सकता, वे अपरिमेय (irrational) हैं। दोनों मिलकर वास्तविक संख्याएँ (real numbers) बनाती हैं।
अंतर्ज्ञान
किसी संख्या को दशमलव में फैलाकर देखें: अगर वह रुक जाए (0.5) या एक ही खंड को दोहराए (0.333…), तो वह परिमेय है। अगर वह कभी न रुके और न दोहराए, तो वह अपरिमेय है — जैसे √2, π, किसी वृत्त की परिधि का अनुपात।
कैसे बनता है
वास्तविक संख्याएँ दो प्रकार में बँटती हैं — परिमेय (जिन्हें भिन्न के रूप में लिखा जा सके) और अपरिमेय (जिन्हें नहीं)। संख्या रेखा का हर बिंदु किसी न किसी वास्तविक संख्या से मेल खाता है, और अपरिमेय संख्याएँ परिमेय संख्याओं के बीच के खाली स्थान भरती हैं।
उदाहरण
क्या √2 अपरिमेय है? चूँकि 1.4²=1.96 और 1.5²=2.25, इसलिए √2, 1.4 और 1.5 के बीच है। आप चाहे जितने अंक जोड़ते जाएँ, यह कभी ठीक-ठीक नहीं बैठती, और यह सिद्ध हो चुका है कि इसे भिन्न के रूप में नहीं लिखा जा सकता।
आम ग़लतफ़हमी
√ चिह्न का मतलब अपने आप अपरिमेय नहीं होता। √9=3 और √16=4 पूर्ण वर्ग (perfect square) हैं, इसलिए वे परिमेय हैं। अपरिमेय संख्याएँ उन मूलों से बनती हैं जो ठीक-ठीक नहीं बैठते, जैसे √2 और √3।
कहाँ उपयोग होता है
वृत्त की परिधि और क्षेत्रफल (π), विकर्ण की लंबाई (√2), प्राकृतिक वृद्धि (e) — वास्तविक आकृतियों और प्रकृति को ठीक-ठीक मापने के लिए अपरिमेय संख्याएँ ज़रूरी हैं।
कहाँ से आया
पाइथागोरस के अनुयायी मानते थे कि 'हर संख्या एक भिन्न है', लेकिन हिप्पेसस ने दिखाया कि √2 ऐसी नहीं है, जिससे उनका संप्रदाय हिल गया; किंवदंती है कि इसी वजह से उसे निकाल दिया गया।
पूर्वापेक्षाएँ
त्वरित जाँच
इनमें से कौन-सी संख्या अपरिमेय है?
- 0.5
- 1/3
- √2✓
- −4
अभ्यास
अपरिमेय संख्या चुनें।
उत्तर: 2
- 1.5 = 3/2 और 2/7 भिन्न हैं → परिमेय
- √4 = 2 → परिमेय
- √3 = 1.732… कभी ठीक-ठीक नहीं बैठती → अपरिमेय
मुख्य बात: जो मूल पूर्ण वर्ग न हो, वही अपरिमेय बनाता है।
परिमेय संख्या चुनें।
उत्तर: 2
- √2, √5, π कभी रुकते या दोहराते नहीं → अपरिमेय
- √9 = 3 → परिमेय
मुख्य बात: जब अंदर की संख्या पूर्ण वर्ग हो, तो मूल सिमटकर परिमेय बन जाता है।
क्या 0.777… परिमेय है? कारण लिखें।
उत्तर: undefined
- अंक 7 एक नियमित पैटर्न में दोहराता है (आवर्ती दशमलव)
- 0.777… = 7/9, जो एक भिन्न है
- → परिमेय
मुख्य बात: आवर्ती दशमलव को भिन्न के रूप में लिखा जा सकता है, इसलिए वह परिमेय है।
एक पंक्ति में समझाएँ कि √2 को भिन्न के रूप में क्यों नहीं लिखा जा सकता (यह अपरिमेय क्यों है)।
उत्तर: undefined
- √2 = 1.41421356… — यह दशमलव कभी खत्म नहीं होता
- और अंकों का कोई भी खंड कभी नहीं दोहराता
- इसलिए इसे पूर्णांक/पूर्णांक भिन्न के रूप में नहीं लिखा जा सकता
मुख्य बात: जो दशमलव न कभी खत्म हो, न दोहराए = अपरिमेय।